ध्यान का महत्व और फायदे हिंदी में – Benefits of Dhyan In Hindi

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Benefits of Dhyan In Hindi - ध्यान का महत्व और फायदे
Benefits of Dhyan In Hindi - ध्यान का महत्व और फायदे

नमस्कार दोस्तों आज के लेख में हम बात करने वाले है ध्यान का महत्व ध्यान करने का सही समय ध्यान की जानकारी Dhyan In Hindi के बारे में तो लेख को पूरा पढ़े।

Dhyan योग करने से हमारे शरीर के तन-मन और ”स्वास्थ” के लिए बहोत फायदे मंद है। विश्व के कई प्रसिद्ध हस्तियों ने यह प्राचीन समय का ध्यान योग का पालन करते थे। और उन हस्तियों ने ध्यान के लाभ और महत्व को स्वीकारा है। वर्तमान समय में dhyaan के अभ्यास करने के लिए कई केंद्र और संस्थाए है। और यह संस्थाए कई भिन्न-भिन्न तरीको से dhyaan करना सिखाया जाता है।

ध्यान का अर्थ क्या है

ध्यान का अर्थ होता है की धर्म और योग की आत्मा कहा जाता है। dhyaan में ध्यानियों की कोई मृत्यु नहीं होती परन्तु जो लोगो को बुढ़ापे में भय सताता है वह भय मृत्यु के भय से उत्पन्न होते है। क्योकि ”अंतकाल” में उस जीवन नष्ट ही हो जाता है ऐसा जान पड़ा।

इसलिए ध्यान करना ”आवश्यक” हो जाता है। dhyaan करने से अपने मूल स्वरूप को प् सकते है यानि की हम कई खो गए है और हमें अपने आप को खोजना है इसके लिए हमारे पास एक मात्र उपाय है वह है ध्यान।

ध्यान कैसे करें?

ध्यान का महत्व और फायदे हिंदी में - Benefits of Dhyan In Hindi

dhyaan ध्यान करने से पहले आपको आराम से बैठना होगा और कोई एक विचार ,वस्तु ,या फिर अपने स्वास पर dhyaan केंद्रित करना होगा। dhyaan के शुरुआत के समय में आपका मन कई अन्य जगहे भटकेगा परन्तु परन्तु dhyaan को भटकने रोकना होगा।

और पिछली बातो को भूल जाना होगा और आपकी कोई भावना या विचार को दबाने मत दीजिये और इन्हे आगे बढ़ने दे ऐसा करने से आपका मन तुम्हारे लक्ष पर dhyaan करने के लिए वापस लोट आएगा।

इसके बाद आपका मन एकदम शांत होगा और ज्यादा समय के बिना भी आप गहरे एकाग्रता के चरण में आसानीसे पहुँच सकते है। और dhyaan आपको वर्तमान समय में ले जायेगा।

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ध्यान के प्रकार 

Types of dhyan – ध्यान करने करने की पद्धति और dhyaan लगाने के केंद्र को देखते हुवे dhyaan को कई भागो में विभाजित किया गया है। जिस भागो को निचे निम्न लिखित है।

  1. भृकुटी ध्यान
  2. ध्यान
  3. प्राणायाम ध्यान
  4. मंत्र ध्यान
  5. तंत्र ध्यान
  6. योग ध्यान
  7. ध्यान का महत्व

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ध्यान के प्रकार फायदे 

ध्यान का महत्व और फायदे हिंदी में - Benefits of Dhyan In Hindi

भृकुटी ध्यान :

इस भृगुति dhyaan को तीसरी आंख पर dhyaan को केंद्रित करनेवाला dhyaan माना जाता है। इसके लिए ध्यानी को आंखे बंध करके अपना पूरा ध्यान ध्यानी के सर की भौहों के मद्यमे लगाना होगा। इस dhyaan को करने के बाद ध्यानी को बाहर और अंदर से पूर्णरूप से शांति का अनुभव महसूस होता है। इस dhyaan में सर के मद्यमे dhyaan केंद्रित करके अंधकार के बिच में मौजूद रोशनी की उस ज्वाला को खोजना होता है। 

जो ध्यानी की आत्मा को परमात्मा तक ले जाने का रास्ता दिखाती है। जब आप प्रतिदिन dhyaan करते है तो ज्योत आपके सामने दिखाई देने लगेंगी और प्रारंभ में यह ज्योत अंधकार में से आएगी और बादमे पिले कलर की हो जाती है बादमे यह रोशनी सफ़ेद होते हुवे नील कलर की हो जाती है और यह ध्यानी को परमात्मा तक ले जाती है।

श्रवण ध्यान

श्रवण ध्यान का अर्थ होता है सुनना इस लिए इस dhyaan सुनकर है। यह dhyaan करने वाले लोग कई कम है जो इस dhyan को सिद्ध करके मोक्ष के रास्ते पर चले। सुनना बहुत ही मुश्किल होता है क्योकि इस ध्यान में dhyaan के मन की भटकनेकी पूरी संभावना रहती है।

इस dhyaan में ध्यानी को बाहरी आवाज सुनना नहीं होता बल्कि अपनी आंतरिक आवाज को सुनना होता है। इस dhyaan के प्रारंभ में आपकी आवाजे कम सुनाई देती है। और धीरे-धीरे ये आवाज नाद में प्रवर्तित हो जाती है एक ऐसा दिन आता है जिस दिन ॐ स्वर की आवाज सुनाई देने लगेगी और इस स्वर का आप जाप भी कर सकते है।

प्राणायाम ध्यान

इस ध्यान में dhyaan अपनी स्वास के माध्यम से करता है। इस ध्यान में व्यक्ति को लम्बी और गहरी सांसो को अंदरलेना और बहार छोड़ना होता है। शरीर मे जाती और निकलती सांसो के प्रति एकाग्र और होशपूर्ण रहना होता है। प्राणायाम dhyaan बहुत ही सरल dhyaan से पहचाना जाता है परन्तु इसके परिणाम बाकि ध्यान के जितने ही महत्व रखता है।

मंत्र ध्यान

मंत्र ध्यान में ध्यानी को अपनी आँखों को बंध करके ॐ मंत्र का उच्चार करना होता है और उस मंत्र पर ही dhyaanकेंद्रित करना पड़ता है। क्योकि हमारे शरीर में एक तत्व आकाश का भी होता है। यह मंत्र आकाश की तरह प्रसारित होता है और ध्यानी के मन को शुद्ध करता है।

जब तक हमारे मन को यह dhyaan बांध के रखता हे तब तक ध्यानी इस ध्वनि को बोल पाते हे लेकिन सुन नहीं पाते।लेकिन जिस समय आपके भीतर की ध्वनि की प्रतिध्वनि सुनाई दे तब समज जाना की आपका मन साफ हो चूका है। इस ध्यान में आप ॐ , ॐ नम शिवाय , राम , आदि आपके प्रिय मंत्र का भी उपयोग कर सकते है।

तंत्र ध्यान 

तंत्र ध्यान में मस्तिष्क को सिमित रखना होता है और अपने भीतर के अध्यात्म पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। इसमें ध्यानी एकाग्रता सबसे महत्व पूर्ण होता है। इसमें dhyaan अपनी आंखे बंध करके उनके रदय चक्र से निकले वाली आवाज पर ध्यान केंद्रित करना होता है। ध्यानी इसमें दर्द और सुख दोना बातो का विश्लेषण कर सकता है।

योग ध्यान

योग का मतलब ही जोड़ना होता है इस कारन योग करने का कोई एक तरीका नहीं होता परन्तु इस ध्यान को करने की प्रक्रिया के अनुसार कुछ अन्य ध्यानो विभाजित किया जाता है। क्योकि योग का मतलब ही जोड़ होता है तो इसे करने का कोई एक तरीका नही होता बल्कि इस dhyaan को इनके करने की विधि के अनुसार कुछ अन्य ध्यानो में बांटा गया है. जो निम्नलिखित है –

ध्यान का महत्व 

ध्यान का महत्व बहुत है जैसे की ईसाई धर्म में प्रार्थना और इस्लाम में नमाज का महत्व ज्यादा होता है जैसे हिन्दू ,बौद्ध और जैन धर्म में dhyaan संध्या वंदना का महत्व ज्यादा होता है। संध्या वंदना का अर्थ होता है की रात की संधि के समय परमेश्वर की वंदना की जाती है। योग में dhyaan का प्रथम और अंतिम उपाय होता है।

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Dhyan Ka Method

सरल जीवन शैली का पालन

ध्यान करने के लिए ओका जीवन सादा -सरल ,सात्विक भोजन करना , शरीर को साफ -स्वच्छ रखना ,सकारात्मक विचार करना और अच्छे गुणों का पालन मन में शांति ,सुकून का अनुभव होता है यह सब ध्यान के लिए मानसिक स्थिति बनता है सभी ध्यान क्रियाये इनके महत्व को स्वीकार करता है।

ध्यान करने का सही समय

ध्यान का महत्व और फायदे हिंदी में - Benefits of Dhyan In Hindi

ध्यान करने का अच्छा समय सुबह में 3 बजे से 7 बजे तक का समय बहोत अच्छा रहता है। और रात के 10 बजे के के बाद का समय अच्छा रहता है। इस समय वातावरण में शांति होती है और वातावरण प्रदूषित नहीं होता। इन ध्यान विधियों के अनुसार ये वक्त मानसिक शक्तियो के विकास के लिए सबसे बेहतर होता है।

ध्यान कहा करे

ध्यान करने का स्थान आपके घर में पूजा करने का स्थान या फिर शांत कमरा या फिर एकांत में खुले स्थान में आप कर सकते है। एक ही स्थान पर प्रतिदिन ध्यान करने से dhyaan में ज्यादा प्रगति होती है dhyaan के लिए यह बहोत अच्छा होता है।

ध्यान किस आसन में करे

ध्यान कर ने के लिए जमीन पर कम्बल या फिर ऊनि आसन बिछाकर उनमे सुखासन या पद्मासन में बैठ सकते है। और चटाई , कुश के आसन ,रुई की दद्दी का भी प्रयोग कर सकते है।

ध्यान में शरीर की स्थिति 

ध्यान में शरीर की मुद्रा में अपने नेत्र पूरी तरह से बंध होने चाहिए और पीठ सीधी होनी चाहिए एक सीधी लाइन में आराम से बैठे। ध्यान में अकड़ कर या फिर ऐसी पोजीशन में न बैठे जिससे दर्द या आपके शरीर को नुकशान हो नहीं तो ऐसी स्थिति में आपका dhyaan अच्छी तरह से नहीं लगेगा। ध्यान में जांधो या घुटनो पर अपने हाथ रखे और हाथ आकाश की तरफ खुले होने चाहिए।

ध्यान में गहरी सांस लें या फिर प्राणायाम करें

dhyaan के प्रारंभ में गहरी साँस लेना या फिर प्राणायाम करना होता है। सांस धीरे-धीरे लेना और धीरे-धीरे छोड़ना होता है। यह प्राणायाम शरीर में और दिमाग में ऑक्सीजन की मात्रा ज्यादा बढ़ाता है। इससे मस्तिष्क सक्रीय बन जाता है

और अपने विचारो को कंटोल किया जा सकता है। क्योकि यह प्राणायाम न करनेवाले लोगो के गुस्से के समय और जोश के समय में सांस तेज चलने लगती है। और दुःख के समय में और ज्यादा निराशा के समय में सांसे की प्रक्रिया धीमी हो जाती है।

इससे सांसो की गति पर असर करता है और असामन्य सांस शरीर में अस्थिरता पैदा हो जाती है। इस कारण प्राणायाम या गहरी और लंबी सांस लेने से मन और विचारो में शांति का अनुभव होता है। जिससे मन एकाग्र बनने में मदद मिलती है।

ध्यान से परमशक्ति के अंश के रूप में अनुभव करना 

संसार में भिन्न-भिन्न प्रकार की ऊर्जा की अभिव्यक्ति होती है। इस पुरे ब्रम्हांड में परम शक्ति या ऊर्जा का अस्तित्व मौजूद है जो इस पृत्वी पर स्थित जिव-जंतु और जानवर का और इस दुनिया का नियमित संचालन कर रहा है। हमारा शरीर भी एक असीम ऊर्जा का एक भाग है। और उससे जुड़े होते है। 

मानव को अपने आप में वह परम स्त्रोत का अंश मानने से हमें अपनी असीम ताकत और संभावना का अनुभव होता है। dhyaan प्रारंभ करे उस दौरान परमपिता या परमशक्ति से प्रार्थना का सकते है इससे हमारा dhyaan सफल बन जाता है और हमें अपने शरीर में दिव्य वास्तविक स्वरूप का अनुभव किया जाता है।

ध्यान से विचारो पर नियंत्रण कैसे करें 

विचारो पर नियंत्रण करना बहोत ही मुश्किल होता है। क्योकि हमारे मन में कई तरह के विचारो की लाइन दौड़ती ही रहती है। एक विचार आगे आना वाले अगले विचार को जन्म देता है और हमारे दिमाग इसी क्रिया में व्यस्त रहता है।

dhyaan विधियों में कहा जाता है की विचारो की गति को नियंत्रित करे और विचार को मुक्त होने का प्रयत्न कीजिये। इस कारण जब मन में विचार आये तो उन्हें प्रवेश करने दे उनमे खोये मत जाये और उलझे भी नहीं।

और बस एक दर्शक की तरह विचरो के प्रवाह की गति को देखे और किसी विचार को पकड़ कर उनके प्रवाह की गति को कम करे। यह करने से विचार की क्षमता की गति कम हो जाती है और मन में कम विचार आते है।

और विचार की क्षमता को कम करने के लिए आपकी इच्छानुसार प्रयत्न की गंभीरता पर निर्भर करता है। यह dhyaan की गहराई में जाने का सही रास्ता है इस कारण धैर्य ,लगन और अच्छीसोच सोच के साथ प्रयास करते रहना चाहिए।

एक लक्ष पर मन केन्द्रित करें 

dhyan में मन में आनेवाले विचार दूर करके एक लक्ष पे एक विचार पर dhyaan केंद्रित करना होगा। करीबन सभी प्रक्रियामे कहा जाता है की आंख बंध करके भौहो के केंद बिंदु पर देखने का प्रयत्न कीजिये और मन को केंद्रित कीजिये।

इस योग में आपको ज्यादा जोर नहीं लगाना है। क्योकि आँखों में और सर में दर्द हो जाता है। इस योग में आसान तरीके से बंध आँखों में आराम से दृस्टि ऊपर रखनी है। कई प्रक्रिया में मन को सांस लेने और छोड़ने पर dhyaan करने के लिए कहा जाता है की सांस लेने छोड़ने के बिच का जो समय है उस पर dhyaan केंद्रित करे।

ध्यान में कोन से मंत्र का जाप करे 

dhyaan की प्रकिया में कहा जाता है की निरंतर विचार में लगे कई एक केंद्र पर स्थिर करने के लिए आप मन में अपने भगवान का मन्त्र या जाप कर सकते है जिस भगवान की पूजा करते है उन भगवान प्रतिमा , रूप ,भाव ,गुणों ,के बारे में सोचिये

या फिर अपने परम गुरु का dhyaan कर सकते है। dhyaan करते समय भगवान की मन में पूजा करे ,और किसी मंत्र का जाप करे या कोई सकारात्मक विचार करे जैसे की में निर्भय हु ,में स्वच्छ हु ,में परम शक्ति का अंश हु आदि इन जैसी क्रियाओंको मन में लेन से मन एकाग्र हो जाता है। 

ध्यान करने के अनोखे फायदे 

  • ध्यान करने से ध्यानी का मन और शरीर की चंचलता और अस्थिरता दूर हो जाती है
  • dhyan करनेसे व्यक्ति की नर्वसता और घबराहट को दूर करता है
  • dhyan करने से जीवन में नियम और अनुशासन का पालन करना संभव बन जाता है
  • dhyaan करने से मानसिक ऊर्जा का विकास बढ़ता है
  • ध्यान करने से रचनात्मकता शक्ति ज्यादा बढती है
  • dhyaan करने से कोई मुश्केली या मानसिक तनाव आप के मन पर राज नहीं कर सकता
  • ध्यान करने से गुस्सा,चिडचिडापन दूर होने से शरीर नर्वस सिस्टम शांत हो जाती है
  • dhyaan करने से शरीर स्वास्थ्य सुधरता है हृदयगति सामान्य बनी रहती है ब्लड प्रेशर को काबू में कर सकते है
  • dhyaan करने से बच्चो के पढाई में मन लगने लगता है ध्यानी की शारीरिक और मानसिक शक्ति की क्षमता ज्यादा बढती है
  • ध्यान करने से और भी कई अन्य लाभ ध्यानी को मिलते है जोकि वह dhyaan करते समय इसका अनुभव किया जाता है।

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Interesting Facts to Dhyan

  • ध्यान करने से मानसिक ऊर्जा का विकास ज्यादा होता है
  • dhyaan  का अर्थ होता है की धर्म और योग की आत्मा कहा जाता है।
  • ध्यान करने की बहुत सारी अलग अलग मुद्रा है।  
  • dhyaan करने से रचनात्मकता शक्ति अधिक होने लगते है। 
  • हमारा शरीर भी एक असीम ऊर्जा का एक हिस्सा है।

Questions 

1. ध्यान करने से क्या होता है ?

dhyaan  एक प्रकार क्रिया है ,उसके अंदर व्यक्ति अपने मन को चेतना की एक विशेष अवस्था में करने का प्रयास करता है।dhyaan का मुख्य आदेश बहुत सारे लाभ हाशिल करना हो सकता है या तो फिर ध्यान करना अपने खुद में एक लक्ष्य हो सकता है। ध्यान से अनेको प्रकार के कार्यो का बोध मिलता है।

2. ध्यान का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है ?

रोजाना dhyan करने से आतंरिक स्त्रोतो से ऊर्जा के बहुत सारे लाभ को बढ़ावा देता है। और तो और सम्पूर्ण जीवन अनुशासित हो जाता है। साथ ही साथ चरित्र बल में भी बढ़ावा देता है। बहुत ही अच्छी एकाग्रता ध्यान का उत्तम नतीजा है।

यह भी कहा जाता है ध्यान आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को सुधार ने में बहुत ही अच्छा है। और तो और उससे इससे आप को रक्तचाप को काबू में करने के साथ साथ रक्त कोलेस्ट्रॉल को भी कम करने आपकी बहुत ही सहायता करता है। 

3. ओशो ध्यान क्या है ? 

dhyan करने के वक्त आप परमात्मा का ज्यादा स्मरण करते हो न या संसार का और उससे सभी विचार है ना ही तो तुम करीब दोहरा रहे हो की अहं ब्रह्मास्मि दिमाग में कुछ भी नहीं आना है। परन्तु शांत होकर एक जगह पर बेठ जाना है।

4. ध्यान क्यों करना चाहिए ?

कहा जाता है की बहुत तरह की आपको ध्यान साधनाये चिंता के साथ तनाव के शिकार हुए लोगो के लिए अति उत्तम कार्य करता है। और तो और माइंडफुलनेस मेडिटेशन भी एक प्रकार की साधना है। 

Disclaimer

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21 COMMENTS

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