वायु मुद्रा क्या है | वायु मुद्रा के फायदे | Vayu Mudra Benefits in Hindi

vayu mudra in hindi : वायु मुद्रा प्रकृति के पांच तत्व मानव के शरीर से भिन्न नहीं होते। अगर आपके शरीर में इन्ही पांच तत्वों से बने शरीर में जब भी किसी तत्व का मात्रा कम होती तो शारीरिक तथा मानसिक बीमारिया उत्पन्न होने लगता है।

प्रकृति के इन्ही पांच तत्व में से ही वायु मुद्रा भी है और वायु मुद्रा बहुत ही महत्वपूर्ण है। वायु मुद्रा तत्व को संतुलित करती है। इस आर्टिकल में हम वायु मुद्रा के बारे में तथा वायु मुद्रा के अभ्यास से होने लाभ के बारे में विस्तार से पढ़ेंगे।

वायु मुद्रा क्या है | what is Vayu Mudra

vayu mudra एक संस्कृत शब्द है। वायु का अर्थ हवा होता है। वायु मुद्रा वात दोष को बैलेंस करने की मुद्रा भी कहा जाता है। ये तो आपको पता ही होगा की वायु मुद्रा हाथो से जुडी मुद्रा है। जो शरीर में वायु के सही प्रवाह को संचालित करने में मदद करता है।

अगर आप वायु मुद्रा करेंगे तो शरीर में अत्यधिक शरीर को नुकसान पहुंचाने वाली हवा निकल जाती है। वायु मुद्रा को करने से हमारे इफेक्ट्स में मौजूद अतिरिक्त हवा और शरीर के लिए हानिकारक हवा समाप्त होती है।

अगर आप नहीं जानते हो की वायु दोष को शरीर से ठीक न किया जाए सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। अगर वायु दोष को ठीक न किया जाये तो ब्रीदिंग रेट भी प्रभावित हो सकता है।

वायु मुद्रा कैसे करे | how to do vayu mudra

vayu mudra images
  • udana vayu mudra को किसी भी स्थिति में कर सकते है।
  • अगर आप चाहे तो बैठकर खड़े होकर लेटकर prana vayu mudra करते हुए या फिर चलते हुए भी वायु मुद्रा कर सकते है।
  • वायु मुद्रा करने के लिए तर्जनी उंगली को अंगूठे के निचे अच्छे प्रेस करे और बाकि की उंगलिया सीधी रखे।
  • इसे करीब 10 से लेकर 15 मिनिटो तक करे। वही दो से तीन बार इसे दोहराये।
  • आपको यही कोशिश करनी चाहिए की दिनभर आप करीब इसे 45 मिनिटो तक करे।
  • जिन लोगो को कब्जियत सहित पेट से जुडी कोई परेशानी नहीं है तो वैसे लोगो को यह योग नहीं करना चाहिए।
  • शरीर में vayu mudra side effects को ठीक करने के लिए सामान्य व्यक्ति को इसे कम से कम पांच से दस मिनिटो तक के लिए करनी चाहिए।

वायु मुद्रा की विधि | method of Vayu Mudra

  • अगर आप वायु मुद्रा करना चाहते है तो सबसे पहले आप जमीन पर कोई चटाई बिछाकर उस पर पद्मासन या सिद्धासन स्थिति में बैठ जाइये और ध्यान रहे की आपकी रीढ़ की हड्डी सीधी हो।
  • आप अपने दोनों हाथो को अपने घुटनो पर रख ले और अपनी हथेलिया को आकाश की तरफ रखनी चाहिए।
  • अब आप अपने अंगूठे के पास वाली यानि की तर्जनी अंगुली को हथेली की तरफ मोड़कर अंगूठे की जड़ में लगा दे और बाकि की उंगलिया को सीधी रखे।
  • आपको आपना सारा ध्यान श्वास पर लगाकर अभ्यास करना चाहिए। आपको अभ्यास के दरमियान श्वास को सामान्य रखना होगा।
  • ऐसी अवस्था में आपको कम से कम 8-10 मिनिट तक रहना चाहिए।

वायु मुद्रा के फायदे | Benefits Of Vayu Mudra | benefits of apana vayu mudra

  1. रोगो में बहुत ही फायदेमद है
  2. पीड़ा लोगो के लिए
  3. शरीर में से पीड़ा को दूर करने के लिए
  4. पीठ दर्द को ठीक करने के लिए
  5. मिचली होने की समस्या के लिए
  6. शरीर के अंगो के लिए
  7. आँखों के लिए
  8. परेशान है तो इसके लिए
  9. मन को शांत रखने के लिए
  10. वात रोग और गठिया रोग को दूर करने लिए

1. रोगो में बहुत ही फायदेमद है

सभी वात रोगो में बहुत ही लाभकारी होता है। अगर शरीर में वायु बढ़ जाये तो शरीर में पीड़ा होने लगती है। शरीर में कमर दर्द घुटनो का दर्द एड़ी का दर्द गठिया सर्वाइकल पीड़ा इत्यादि पीड़ा होने लगती है।

ये सभी पीड़ाओं में कुपित वायु को शांत करने के लिए वायु मुद्रा लगानी चाहिए फल स्वरूप में दर्द में आराम मिलता है। वायु मुद्रा का अभ्यास रोज 45 मिनिट तक लगातार कई दिनों करे।

2. पीडित लोगो के लिए

vayu mudra जोड़ो की पीड़ा में लाभदायक होती है। अधिक वायु जोड़ो में द्रव्य को सूखा देती है। अगर वायु घुटनो के जोड़ो में घुस जाती तो दर्द होता है। इसके लिए वायु मुद्रा करेंगे तो जोड़ो की पीड़ा में राहत मिलती है।

3. शरीर में से पीड़ा को दूर करने के लिए

मुद्राओ से जानकर मानते है की वायु मुद्रा को नियमित करने से कोई भी बीमारी शरीर में दस्तक नहीं दे सकती है। अगर आपको शरीर में कोई पीड़ा हो या शरीर सुन्न पड़ने के किसी भी स्थिति से बचने के लिए वायु मुद्रा अत्यंत लाभकारी होता है।

4. पीठ दर्द को ठीक करने के लिए

वात दोष के कारण होने वाली पीठ दर्द को ठीक करने के लिए वायु मुद्रा काफी मददगार होता है। जिन लोगो में सैनोवियल फ्लूड और जो ज्वाइंट में लुब्रिकेट का काम करते है उसकी कमी के कारण पीठ दर्द की समस्या होती है। अगर आपके शरीर में से हड्डियों के चटकने जैसी आवाज आती है तो ऐसे लोगो को वायु मुद्रा करनी चाहिए इससे काफी राहत मिलती है।

5. मिचली होने की समस्या के लिए

अगर आपको पेट सबंधी समस्या जैसी की अपच होना पेट फूलने की समस्या अथवा मिचली होने की समस्या में वायु का अभ्यास तुरंत आराम देता है। अगर किसी को यात्रा के दौरान उल्टी अथवा मिचली की समस्या होती है ऐसे में आप यात्रा के दौरान वायु मुद्रा करेंगे तो आपको उल्टी नहीं होगी।

6. शरीर के अंगो के लिए

अगर आपके शरीर में रक्त का संचार ठीक नहीं है तो यह शरीर के अंगो के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। यदि रक्त संचार ठीक नहीं है तो इससे आपको हाथ-पैर का कम्पन अंगो का सुन्न होना लकवा आदि हो सकते है। वायु मुद्रा के अभ्यास से इन सभी गंभीर बीमारयो से राहत मिल सकती है।

7. आँखों के लिए

वायु मुद्रा आँखों को बार-बार झपकने रुक-रुक कर डकार आने और हिचकी को कम करने में सहायक है।

8. परेशान है तो इसके लिए

अगर आप गैस जैसे रोगो से परेशान है तो इसके लिए वायु मुद्रा लाभकारी है। पेट में जब गैस बढ़ जाती है। और खाने के बाद बेचैनी होती है। अगर आपको उलटी करने का मन होता है। अपच की समस्या हो तो वायु मुद्रा का प्रयोग करे। बस में यात्रा करते समय वायु मुद्रा करे तो उल्टी की शिकायत नहीं रहती।

9. मन को शांत रखने के लिए

अगर आपका मन नियमित अभ्यास से चंचल हो रहा है तो मन को आसानी से वायुमुद्रा सेशांत तथा एकाग्र किया जा सकता है। इसके फलस्वरूप में आपका मस्तिष्क स्वस्थ तथा तेज होने के साथ स्मरण शक्ति में भी बढ़ोतरी होती है।

10. वात रोग और गठिया रोग को दूर करने लिए

वायु मुद्रा वात रोग और गठिया रोग को शीध्र दूर करने में सहायक है। अगर वायु मुद्रा के साथ दिन में 3 से 4 लीटर पानी पिने से आप सभी बीमारियों से छुटकारा पाया जा सकता है।

वायु मुद्रा का अर्थ | Meaning of vayu Mudra

अगर आपको वायु मुद्रा का अर्थ जानना चाहते है तो निचे आए ,आइए देखते है वायु मुद्रा का अर्थ। वायु का अर्थ हवा होता है। वायु मुद्रा आपके शरीर में वायु तत्व की देखभाल करती है।

वायु मुद्रा आपके शरीर के अंदर हवा की गति को नियत्रित करता है जो लंबे समय में आपके शरीर को स्वस्थ रखेगा। वायु हाथ मुद्रा वो सभी बीमारियो और अनियमितताओं का ध्यान रखती जो वायु के असंतुलित के कारण होता है।

वायु मुद्रा चरण | vayu mudra exchange stage

अगर आपको वायु मुद्रा के बारे में नहीं पता तो निचे दिए विस्तृत चरण को ध्यान से देखे जो आपको बताएगा की इस वायु मुद्रा को कैसे करना चाहिए। योग और मुद्रा व्यायाम आराम कारक पर ज्यादा जोर देते है। तो बस आप सिर्फ आराम और आरामदायक होने के लिए तैयार रहे। आप निश्चित कीजिए की आप वास्तव में ही ढीले यानि की खुले कपडे पहन रहे है।

ये योग करते समय आपका शरीर स्वतन्त्र होने का महसूस करना चाहिए तभी आपका मन योग या मुद्रा पर ध्यान केंद्रित कर सकेगा। ये इसकी सफलता की कुंजी है इसे यद् रखे व्यायाम हकीकत में आराम और आरामदायक होने में सक्षम है।

एक बार यह करवाई के बाद बाकि जगह गिर जाएगी। अपने अंगूठे के आधार पर तर्जनी की नोक रखने के साथ शुरू करे। अब आप अपनी अंगुली पर अंगूठे को धीरे से दबाए। इसकी वजह से अग्नि द्वारा तत्व वायु के दमन की मात्रा होती है।

वायु मुद्रा की सावधानिया | Vayu Mudra precautions

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अगर आपके शरीर में किसी भी प्रकार का दर्द हो तो वायु मुद्रा करने से शरीर का कोई भी दर्द ठीक हो जाता है। लेकिन इसके अधिक लाभ के लालच में आके आप अनावश्यक रूप से अधिक समय तक नहीं करे अन्यथा लाभ के स्थान पर कोई हानि हो सकती है। पीड़ा के शांत होते ही इस मुद्रा को खोल देना चाहिए।

अगर आप वायु रोगो को दूर करना चाहते है तो इसके लिए गैस व् यूरिक एसिड उत्पन्न करने वाले भोज्य पदार्थो सेवन करना छोड़ दे ज्यादा नहीं सिर्फ कुछ दिनों के लिए जैसे पनीर राजमा मटर दाले सोया गोभी इत्यादि। अगर आपको दालों का उपयोग करना भी हो तो सिर्फ मुंग साबुत का ही उपयोग वो भी सिर्फ दिन में ही करे।

वायु मुद्रा के नुकसान | vayu mudra ke nukasaan

वैसे तो सभी मुद्रा हमरे स्वास्थ्य के लिए लाभ होते है। वैसे ही वायु मुद्रा भी हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। लेकिन बहुत कुछ मुद्रा ऐसी भी है जो हमारे स्वास्थ्य को नुकसान कर सकती है।

यदि आप वायु मुद्रा को करने के दौरान किसी प्रकार के नुकसान को महसूस करते है तो इस योगिक क्रिया को जल्द से जल्द बंद कर देना चाहिए और किसी एक्सपर्ट की सलाह लेनी चाहिए। सलाह लेकर उस सलाह पर चलना चाहिए।

वायु मुद्रा का वीडियो | vayu mudra ka Video

FAQ

Q : चिंता के लिए कौन सी मुद्रा सर्वोत्तम है?

A : apan vayu mudra जिसे आमतौर पर मृत्युसंजीवनी मुद्रा के रूप में जाना जाता है एक अत्यंत शक्तिशाली मुद्रा है। जो शरीर के भीतर वात दोषों के कारण असंतुलन से उत्पन्न चिंता को कम करने में मदद करती है।

Q : वायु मुद्रा कैसे काम करती है?

A : वायु मुद्रा करने के लिए तर्जनी की नोक को अंगूठे की गेंद पर रखें और फिर अंगूठे को तर्जनी के ऊपर मजबूती से रखें। वायु मुद्रा शरीर में वायु तत्व को नियंत्रित करती है। यह पेट में गैस से राहत देता है शरीर की चर्बी कम करता है और पाचन में सुधार करता है।

Q : नींद न आने के लिए कौन सी मुद्रा अच्छी है?

A : अपनी अनामिका और पिंकी उंगलियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करते हुए उठाएं और इस स्थिति में कई मिनट तक सांस लेते रहें। यह शक्ति मुद्रा पुरानी अनिद्रा के साथ मदद करती है खासकर अगर दैनिक अभ्यास किया जा सकता है।

Q : कौन सी मुद्रा सबसे अच्छी है?

A : ध्यान मुद्रा को ध्यान मुद्रा भी कहा जाता है। ज्ञान चिन और ध्यान अब तक ध्यान के लिए सबसे प्रसिद्ध हाथ की स्थिति हैं। ध्यान करने का सबसे अच्छा तरीका है बैठना। अपने दाहिने हाथ के बाहरी हिस्से को अपने बाएं हाथ की हथेली में रखें।

Q : क्या वायु मुद्रा लेट कर की जा सकती है?

A : हवा की मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है, यह आपके शरीर में हवा को संतुलित करने के लिए किया जाता है। यह मुद्रा बैठे खड़े या लेटते समय की जा सकती है। आपको अपनी तर्जनी को मोड़ना होगा और दूसरी हड्डी को अपने अंगूठे के आधार से दबाना होगा। आपकी बाकी तीन अंगुलियों को फैलाकर रखना चाहिए।

Q : कौन सी मुद्रा दिल के लिए अच्छी है?

A : वायु मुद्रा चिकित्सीय मुद्रा की श्रेणी में है और इसे एक या दोनों हाथों से किया जाता है। कभी-कभी मृत संजीवनी मुद्रा के रूप में जाना जाता है, इस मुद्रा के कई लाभ हैं और शारीरिक या मानसिक / भावनात्मक हृदय की स्थिति वाले किसी भी व्यक्ति के लिए लक्षण राहत और जाने में मदद के लिए है

Q : मुझे वायु मुद्रा कब करनी चाहिए?

A : इसके प्रभाव से बचने के लिए भारी चीजें उठाने के बाद तुरंत 5 मिनट के लिए वायु मुद्रा का अभ्यास करना चाहिए। इसी तरह मोच आने पर वायु मुद्रा करनी चाहिए। मोच वाली जगह पर समाना मुद्रा रखते हुए इसे विपरीत हाथ से करना चाहिए। दर्द की किसी भी स्थिति में इसका अभ्यास किया जा सकता है.

Disclaimer :  Vayu Mudra Aur Upyog इस का उपयोग करने से पहले डॉक्टर की सला ले इसके बाद इसका उपयोग करे तो फ़्रेन्ड उम्मीद करता हु की हमारा यह लेख  Vayu Mudra Aur Upyog आप को जरूर पसंद आया होगा तो दोस्त इसी तरह की जानकारी पाने के लिए हमरे साथ जुड़े रहिये और आपके मनमे कोई भी प्रश्न हो तो हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताये।

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