उष्ट्रासन क्या है | उष्ट्रासन के फायदे | How To Use Ustrasana In Hindi

ustrasana in Hindi हमारे शरीर को मानसिक एवं शारीरिक रूप से ‘स्वस्थ” बनाए रखने के लिए उष्ट्रासन एक उपयोगी आसान है। इस आसान को उष्ट्रासन इसलिए कहा जाता है। “क्योंकि” इस आसन में शरीर को एक प्रकार का आकार दिया जाता है। कैमेंट एक “संस्कृत” भाषा है और इसका मतलब है।

उत्रसना को अंग्रेजी में कैमल पोज कहा जाता है। इस आसन का अभ्यास करने में शुरुआत में थोड़ी कठिनाई ज़रूर होगी परंतु अभ्यास बढ़ जाने के बाद यह आसन बड़ी सरलता से किया जा सकता है। उत्तरासन शरीर में रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाता है। सर्वांग-आसन करने के बाद उष्ट्रासन करना अधिक फायदेमंद  होता है।

उष्ट्रासन क्या है | What is Ustrasana

ustrasana (camel pose)की आकृति बनाता है। इस आसन को अंग्रेजी में उष्ट्रासन या ऊँट की ustrasana pose भी कहा जाता है। जिस प्रकार एक आसन कठिन रेगिस्तानी परिस्थितियों में आसानी से जीवित रह सकता है। यदि यह आसन नियमित रूप से किया जाए तो यह शरीर से सभी शारीरिक और मानसिक परेशानी को दूर करके स्वस्थ जीवन देने में मदद करता है। 

उष्ट्रासन के 4 फायदे | Ustrasana Benefits In Hindi | Benefits of ustrasana

  1. पेट की चर्बी को कम करने में
  2. डायबिटिक के लिए फायदेमंद है
  3. आंखों की रोशनी को बढ़ाने में फायदेमंद है
  4. ustrasana drawing को स्वस्थ रखने के लिए

1. पेट की चर्बी को कम करने में

उष्ट्रासन आसन को करने से आप अपनी पेट की चर्बी को तेजी से कम करने के साथ बढ़ते वजन को भी कंट्रोल कर सकते हैं। इस उष्ट्रासन को सही ढ़ग और नियमित रूप से करने पर आपको कुछ समय ही फर्क दिखने लगेगा।

2. डायबिटिक के लिए फायदेमंद है

अगर आप डायबिटिक है। तो ustrasana yoga आपके लिए बहुत फायदेमंद होता है। इस आसन को करने से आप की डायबिटीज को काफी हद तक कंट्रोल कर सकता हैं। ustrasana yoga pose आपके पैंक्रियास को उत्तेजित करके इंसुलिन के स्राव में मदद करता है। जिससे डायबिटीज कंट्रोल में आ जाती है।

3. आंखों की रोशनी को बढ़ाने में फायदेमंद है

आंखों की रोशनी बढ़ाने या इससे जुड़ी किसी है भी प्रॉब्लम को दूर करने के लिए भी यह आसन बहुत फायदेमंद होता सकता है।

4. फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए

फेफड़ों को स्वस्थ और बीमारियों से बचाने के लिए यह बिल्कुल परफेक्ट आसन है। इस उष्ट्रासन आसन को नियमित रूप से करने पर फेफड़े से संबंधित परेशानियां दूर हो सकती है।

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उष्ट्रासन कैसे करें | How to do Ustrasana

ustrasana images

अब दोनों पैर सामनें की ustrasana stretches कर बैठ जाएं। अब अपनें दाएं पैर को घुटनें से मौड़ कर दाएं कूल्हे के नीचे लगा लें। और बायें पैर को घुटनें से मौड़ कर बाएं कूल्हे के नीचे लगा लें। (यह मुद्रा ठीक वैसी ही होनी चाहिए जैसे की वज्रासन मैं होती है। उष्ट्रासन करने के लिए सर्वप्रथम स्वच्छ निर्मल और समथल स्थान देख लीजिये|

उसके पश्चात एक सादा आसन या चटाई बिछा लीजिये। (अगर यह आसन सुबह के समय खुली हवादार जगह में किया जाए तो अधिक लाभदायक होता है।अब दो पैरों को फैलाकर बैठ जाएं। अब अपने दाहिने पैर को घुटने के दाहिने कूल्हे के नीचे रखें। और घुटने से बाएं पैरको निचोड़ने के बाद इसे बाएं कूल्हे के नीचे लागू करें। (यह आसन व्रजासन जैसा ही होना चाहिए)।अब आगे दाहिने पैर की एड़ी को अपने दाहिने हाथ से पकड़ें और बाएं पैर के किनारे को बाएं हाथ से पकड़ें।जितना संभव हो सके अपना सिर वापस पाने की कोशिश करें और जानें। अब सामान्य गति से शरीर के अंदर गहरी सांस लें। जब तक आप अपनी सांस रोक सकते हैं

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उष्ट्रासन करने का तरीका | Method of Ustrasana

उष्ट्रासन क्या है | उष्ट्रासन के फायदे | How To Use Ustrasana In Hindi

इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाएं। इस बात का ध्यान रखें कि जांघों तथा पैर एक साथ हो और पंजे पीछे की ओर फर्श पर हो। घुटनों और पैरों के बीच लगभग एक फुट की दूरी रखें। इसके बाद अपने घुटनों के बल खड़े हो जाएं और सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें।

अब दाहिनी हथेली को दाईं एड़ी और बाईं हथेली को बाईं ओर रखें। पीछे मुड़ते समय गर्दन को झटका न दें इसका ध्यान रखें। इसके बाद सिर को पीछे झुकाएं जांघों के साथ फर्श पर एक समकोण बना। हाथों और पैरों पर शरीर का वजन समान होना चाहिए। अब धीरे धीरे सांस ले और धीरे धीरे सांस छोड़े। फिर लंबी गहरी सांस छोड़ते अपनी सामान्य स्थिति में आ जाएं। आप इस आसन को  5-7 बार कर सकते हैं।

उष्ट्रासन की विधि | Law of ustrasana

  • ध्यान रहे जांघों तथा पैरों को एक साथ रखें पंजे पीछे की ओर हों तथा फर्श पर जमे हों।
  • घुटनों तथा पैरों के बीच करीब एक फुट की दूरी रखें।
  • सबसे पहले आप फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाएं या आप वज्रासन में बैठे।
  • श्वास लें पीछे की ओर झुकें और अब दाईं हथेली को दाईं एड़ी और बाईं हथेली को बाईं ओर रखें।
  • पीछे मुड़ते समय गर्दन को झटका न दें इसका ध्यान रखें।
  • अंतिम मुद्रा में जांघ फर्श के साथ एक समकोण बनाएगी और सिर पीछे की ओर झुका होगा।
  • हाथों और पैरों पर शरीर का वजन समान होना चाहिए।
  • जब तक संभव हो अपनी आवश्यकताओं के अनुसार मुद्रा बनाए रखें।
  • और फिर लंबी गहरी सांस छोड़ते अपनी आरंभिक अवस्था में आएं।
  • इस तरह से आप इसको पांच से सात बार कर सकते हैं।

उष्ट्रासन की सावधानियां | Ustrasana benefits and precautions

  • हृदय रोग से पीड़ित व्यक्ति को भी उष्ट्रासन नहीं करना चाहिए।
  • अर्धशीशी (Migraine) रोग के दर्दी को भी यह आसन हानी कारक हो सकता है।
  • यदि आपको पीठ दर्द है तो ऐसे व्यक्ति को डॉक्टर से परामर्श करने के बाद ही साँस छोड़ना चाहिए।
  • steps of ustrasana करते समय गर्दन को बहुत पीछे न खींचें।
  • इस आसन को करते समय, यदि आपके पीठ या किसी अन्य अंग में
  • दर्द हो तो इस आसन को तुरंत रोक दें और डॉक्टर के पास जाएँ।
  • गर्दन पर अधिक भार पड़ने से दिमाग को खून और प्राणवायु (oxygen) पहुचने वाली नसों को नुकसान हो सकता है इसलिए इस पॉइंट को ठीक से ध्यान में रखें।
  • उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए अगर उनके शरीर पर किसी तरह की सर्जरी हुई हो।
  • गर्भवती महिला को भी इस आसन को नहीं करना चाहिए।
  • अन्य आसन की तुलना में यह एक कठिन आसन है।
  • और एक नए सीखा व्यक्ति के लिए यह पूर्ण ज्ञान का उपयोग
  • याद रखें कि जब तनाव होता है तो मुंह को पूरी तरह से बंद करना पड़ता है। 
  • और नाक को अंदर और बाहर निकालना पड़ता है।
  • इसलिए यह आसन किसी yoga ustrasana टीचर की निगरानी में ठीक से सीख लेने के बाद ही करना चाहिए।

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पूर्ण उष्ट्रासन | purna ustrasana

उष्ट्रासन की अंतिम अवस्था में पहुंचने के बाद हमारे शरीर की आकृति कुछ-कुछ ऊंट के समान प्रतीत होती है इसी कारण इसे उष्ट्रासन कहते हैं। यह आसन वज्रासन में बैठकर किया जाता है। उष्ट्रासन शरीर के अलगे भाग को लचीला और मजबूत बनाता है यह आसन छाती का विस्तार करता है

और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है। इस आसन का उपयोग रीढ़ और पीठ को मजबूत बनाने के लिए भी किया जाता है। यह आसन गले के रोगों में भी लाभदायक है। यह आसन पेट से संबंधित बीमारियों जैसे कब्ज अपच एसिडिटी को रोकने में मदद करता है। गले संबंधी रोगों में भी यह आसन लाभदायक है।

अर्थ उष्ट्रासन | Arthas Ustrasana | ardha ustrasana

उत्तरासन दो शब्दों से बना है। कैमेंट का मतलब होता है। इस आसन में शरीर एक लिंट की तरह दिखता है यही वजह है कि इसे इस नाम से पुकारा जाता है। स्वास्थ्य लाभ के अनुसार बैठने की मुद्रा में उत्तरासन एक महत्वपूर्ण योगासन है। उतरासन एक योग व्यायाम है जो क्रोध और शारीरिक विकारों पर काबू पाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

Ustrasana Ka Video

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FAQ 

Q : उष्ट्रासन को कौन से आसन से पहले करना चाहिए?

A : इस आसन को करने के लिए सबसे पहले आप फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाएं। सुनिश्चित करें कि जांघ और पैर एक साथ हैं और पंजे के पिछले भाग फर्श पर हैं। घुटनों और पैरों के बीच लगभग एक फुट की दूरी रखें। इसके बाद आप अपने घुटने पर खड़े होकर हो जाएं और सांस लेते हुए पीछे की ओर झुकें।

Q : उष्ट्रासन कैसे करें?

  • A : ध्यान रहे जांघों तथा पैरों को एक साथ रखें, पंजे पीछे की ओर हों तथा फर्श पर जमे हों।
  • अब आप अपने घुटनों पर खड़े हो जाएं।
  • सबसे पहले आप फर्श पर घुटनों के बल बैठ जाएं या आप वज्रासन में बैठे।
  • घुटनों तथा पैरों के बीच करीब एक फुट की दूरी रखें।

Q : उष्ट्रासन और इसके फायदे क्या है?

A : कूल्हों को खोलता है। गहरे कूल्हे फ्लेक्सर्स को खींचता है। स्ट्रेच और कंधों और पीठ को मजबूत करता है। पेट क्षेत्र का विस्तार करता है। पाचन और उन्मूलन में सुधार करता है। मुद्रा में सुधार करता है। छाती को खोलता है। श्वसन में सुधार करता है। 

Disclaimer 

How To Use Ustrasana In Hindi – तो  फ़्रेन्ड उम्मीद करता हु की हमारा यह लेख आप को जरूर पसंद आया होगा तो दोस्त इसी तरह की जानकारी पाने के लिए हमरे साथ जुड़े रहिये और आपके मनमे कोई भी प्रश्न हो तो हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताये। 

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