उज्जायी प्राणायाम के फायदे | How To Use Ujjayi Pranayama In Hindi

Ujjayi Pranayama In Hindi यह हठयोग के आठ कुंभकास में से एक हिस्सा है। एक्सपर्ट बताते हैं कि हमारे सांसों की क्वालिटी काफी अहम होती है। “क्योंकि” हमारे सांस ही यह हमारी आंतरिक फिलिंग्स को बताते हैं। यदि आप कभी भी योगा क्लास में गए हो तो आपने यह सुना होगा कि उज्जायी ब्रीद की तरह सांसें लीजिए। उज्जायी प्राणायाम एक खास प्रकार का श्वास है जिसे कई योगाभ्यास में इस्तेमाल किया जाता है।

प्राणायाम और योग के द्वारा स्वस्थ्य जीवन जीया जा सकता है। योग गुरु बताते हैं कि इसे कर बीमार रहित जिंदगी जी जा सकती है। इस कड़ी में हम आपको ujjayi pranayama steps बारे में और इसके लाभों के साथ कैसे करें इसके बारे में बताएंगे। लेकिन पहले यह जानना बहुत जरूरी है कि उज्जायी प्राणायाम क्या है। उज्जैन शब्द जय का जन्म हुआ है। ऐसी “अवस्था” में जो प्राणायाम हमें बंधन से मुक्त करता है।

उज्जायी प्राणायाम क्या है | What is Ujjayi Pranayama

उज्जयी प्राणायाम एक ऐसी प्राणायाम है जिसका नियमित रूप से अभ्यास करने से आपकी एजिंग प्रोसेस धीमी हो जाती है और आप बहुत लंबे समय तक जवां लगते हैं। इस प्राणायाम से कई स्वास्थ्य लाभ होते हैं। अब हम इस प्राणायाम की परिभाषा के बारे में जानेंगे। यह दोनों नथुनों के माध्यम से धीरे-धीरे बाहर निकलता है। और जब साँस छोड़ता है। तो दाहिनी नासिका बंद हो जाती है और बाईं नासिका धीरे-धीरे बाहर निकलती है। जब दोनों नासिका से सांस लिया जाता है तो गर्दन के ujjayi pranayama cure thyroid वाले हिस्से को कंपन कराके ऊं की ध्वनि उत्पन्न की जाती है। यह “ध्वनि” उज्जयी प्राणायाम की विशिष्टता है।

उज्जायी प्राणायाम के 4 फायदे | 4 Benefits Of Ujjayi pranayama

  1. ह्रदय रोगों में फायदेमंद है
  2. पेट की चर्बी को करता है कम
  3. पाचन क्रिया को ठीक रखता में
  4. फेफड़ों को मजबूत बनाने में

1. ह्रदय रोगों में फायदेमंद है

इस प्राणायाम के अभ्यास से हम ह्रदय के ज्यादातर सभी रोगों को नष्ट कर सकते हैं। यहाँ तक कि कमिनेटिक हृदय से भी हमें बहुत सारी बीमारियाँ होती हैं। जैसे कि दिल का दौरा ब्लो लो जे आदि। जब हम दिल के करीब होते हैं तो हम इन रोगों से छुटकारा पा सकते हैं।

2. पेट की चर्बी को करता है कम

यह प्राणायाम पेट की चर्बी को कम करने में हमारी मदद करता है। बेली फैट या शरीर के अन्य हिस्सों से वसा का एक विशेष रूप से हानिकारक प्रकार है जो आपके अंगों के आसपास जमा होती है।

3. पाचन क्रिया को ठीक रखता में

प्राणायाम से पाचन क्रिया अच्छी बनी रहती है और यह श्वसन प्रणाली को भी सेहतमंद बनाये रखता है। पाचन एक ऐसी गतिविधि है जिसमें भोजन यांत्रिक रूप से और रासायनिक रूप से छोटे भागों में टूट जाता है ताकि वे रक्तप्रवाह में अवशोषित हो जाएं। पाचन एक प्रकार का अपचय है जिसमें आहार के बड़े अणुओं को छोटे-छोटे अणुओं में बदल दिया जाता है।

4. फेफड़ों को मजबूत बनाने में

इसका सबसे अच्छा फायदा ये है की ये हमारे फेफड़ों को मजबूत बनता है। फेफड़े हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। एक व्यक्ति दिन में लगभग 20 बार सांस लेता है और प्रत्येक सांस के साथ शरीर में जितनी अधिक ऑक्सीजन पहुंचती है शरीर उतना ही स्वस्थ रहता है। इस प्राणायाम से आपके फेफड़े मजबूत होते हैं। और उनकी प्राणवायु लेने की क्षमता में वृद्धि होती हैं।

उज्जायी प्राणायाम कैसे करें | how to do ujjayi pranayama

Ujjayi Pranayama

इसको करने के लिए सबसे पहले एक स्थान पर बैठ जाए। इस समय आप सुखासन की मुद्रा में बैठ सकते हैं। इसके बाद अपनी आंखों को बंद कर लें और अपने मुंह को हल्का सा खोल कर अपने मसूड़ों और जीभ को आराम देने की कोशिश करें। इसके बाद मुंह के माध्यम से श्वास छोड़ें। इसके अलावा अपने मुंह से अपने फेफड़ों में बहने वाली हवा को महसूस करने की कोशिश करें। इसके बाद जब आप साँस छोड़ते हैं। तो अपनी गर्दन के पीछे एक छोटी सी अहा ध्वनि महसूस करें और साँस लेते समय साँस छोड़ें।

इसके बाद जैसे ही आप इस प्राणायाम में लीन होते हैं। और आपका सारा ध्यान आपकी सांसों की गति पर होता है। आप देखेंगे कि आपकी सांसों से कलने वाली आवाज पूरी तरह से हवा के चलने की आवाज जैसी लगती है। समुद्र है। अपने सांसो से आने वाली ध्वनि को महसूस करने की कोशिश करें और अपने मन को शांत रखें। इसके बाद अपने फेफड़ों को श्वास के माध्यम से पूरी तरह से भर लें और फिर पूरी तरह से खाली भी कर लें। शुरुआत में यह प्राणयाम कम से कम 5 मिनट तक करे और इसके बाद इसे बढ़ाते हुए 15 मिनट तक लेकर जायें।

उज्जायी प्राणायाम करने का तरीका | ujjaayee praanaayaam karane ka tareeka

Ujjayi Pranayama
  • किसी भी आरामदायक आसान में बैठ जायें। पूरे शरीर को शिथिल कर लें।
  • थोड़ी देर बाद अपना ध्यान गले पर ले आयें।
  • ऐसा महसूस करें या कल्पना करें कि सांस गले से आ रही है।
  • जब साँस धीमी और गहरी हो जाती है। तो गले को संकीर्ण करें। ऐसा करने से आपके गले में और बाहर होने पर धीमी आवाज होनी चाहिए।
  • ऊपर बताए अनुसार बायीं दायीं और दोनों नासिका से श्वास से श्वास लेना एक भास्त्रिका प्राणायाम का पूरा चक्र होता है।
  • ऐसा 10-20 मिनिट तक करें।
  • अगर आपको ज़्यादा देर बैठने में परेशानी हो तो ujjayi pranayama technique लेटकर या कड़े हो कर भी कर सकते हैं।

उज्जायी प्राणायाम की विधि | Method of ujjayi pranayama

  • सबसे पहले आप पद्मासन या सिद्धासन में बैठ जाए।मुंह बंद रखें।
  • अब धीरे-धीरे दोनों नासिका से लय के साथ श्वास लें जब तक कि फेफड़े में पूरी तरह से सांस न भर जाए।
  • जब दोनों नासिका से सांस लें तो गर्दन के थाइरोइड वाले हिस्से को कंपन कराके ऊं की ध्वनि उत्पन्न करने की कोशिश करें।
  • ये ध्वनि हल्की और समान होनी चाहिए।
    साँस लेते समय छाती को फुलाएँ।
  • अपनी सांस को तब तक रोके रखें जब तक आप उसे रोक नहीं सकते।
  • फिर दाएं नथुने को दाहिने अंगूठे से बंद करें और बाएं नथुने से धीरे-धीरे सांस छोड़ें।
  • बायीं नासिका से श्वास छोड़ने की बजाय आप दोनों नासिकाओं से भी धीरे-धीरे श्वास छोड़ सकते हैं।
  • यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप 10 चक्र करें।

उज्जायी प्राणायाम की सावधानियां | Ujjayi Pranayama’s precautions

  • उज्जयी प्राणायाम उन्हें नहीं करनी चाहिए जिनका थाइरोइड बहुत अधिक बढ़ा हुआ हो।
  • ऐसे व्यक्ति को किसी विशेषज्ञ के निगरानी में इस प्राणायाम की प्रैक्टिस करनी चाहिए।
  • निम्न रक्तचाप वाले लोगों को यह प्राणायाम नहीं करना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप और हृदय रोगियों को कुंभक नहीं करना चाहिए वो बिना कुंभक के इसे कर सकते हैं।

ujjayi pranayama video

FAQ

Q : उज्जायी प्राणायाम हम कितनी बार कर सकते हैं?

A : 5-10 चक्रों के लिए प्रत्येक करें। जब आपको लगे कि आप यहाँ से आगे बढ़ना चाहते हैं। तो अपने हाथ को आराम दें और उज्जायी प्राणायाम शुरू करें। आप अपने आप को 2 मिनट के लिए स्टॉपवॉच के साथ समय दे सकते हैं या चुन सकते हैं कि आप कितने सांसों का लक्ष्य बनाना चाहते हैं (ujjayi pranayama steps and benefits)।

Q : उज्जायी प्राणायाम क्या हम पीरियड्स में कर सकते हैं?

A : यदि किसी महिला को बहुत अधिक मासिक धर्म हो रहा है। तो भी अभ्यास करने की सोच नकारात्मक भावनाओं का कारण होगी। इस समय सबसे अच्छा अभ्यास है योग निद्रा और कुछ कोमल प्राणायाम जैसे भ्रामरी (गुनगुना मधुमक्खी की सांस) औलोम विलोम (वैकल्पिक नासिका श्वास) उज्जायी (विजयी श्वास) और गहरी श्वास।

Q : उज्जायी क्या हम कभी भी कर सकते हैं?

A : आप अपनी इच्छानुसार कभी भी उज्जयी श्वास का अभ्यास कर सकते हैं। आप अपने योग चटाई पर नहीं है। लेकिन अगर आप अपनी योग चटाई पर हैं। तो स्वीकार करें कि सांस शरीर में गर्मी पैदा करती है।

Q : उज्जायी प्राणायाम श्वास से क्या फायदा होता हैं?

A : उज्जायी प्राणायाम दोनों स्फूर्तिदायक और फायदेमद है। क्योंकि यह पूरे शरीर में ताजा ऑक्सीजन भेजता है। जब सही ढंग से अभ्यास किया जाता है तो यह आंतरिक गर्मी पैदा करेगा और आपको ऊर्जा का उत्थान देगा। इसका उपयोग भौतिक शरीर में प्राण (ujjayi pranayama art of living) के प्रवाह को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

Disclaimer 

How To Use ujjayi pranayama In Hindi – तो  फ़्रेन्ड उम्मीद करता हु की हमारा यह लेख आप को जरूर पसंद आया होगा तो दोस्त इसी तरह की जानकारी पाने के लिए हमरे साथ जुड़े रहिये और आपके मनमे कोई भी प्रश्न हो तो हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर बताये। 

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