सलभासन क्या है | सलभासन के फायदे | How To U Salabhasana In Hindi

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salabhasana in Hindi : salabhasana yoga से शरीर और मन को मजबूती मिलती है इस बात से लगभग हर कोई परिचित होगा। वहीं योग में कई ऐसे आसन हैं। जो शरीर के विशेष हिस्सों को लाभ देने के साथ-साथ मानसिक शक्ति बढ़ाने का काम भी कर सकते हैं। ऐसा ही एक योगासन है। शलभासन। माना जाता है कि अगर इसका नियमित अभ्यास किया जाए तो व्यक्ति कई “स्वास्थ्य” लाभ प्राप्त कर सकता है।

सलभासन क्या है | What is Salabhasana

शलभासन एक संस्कृत शब्द है। जिसमें शलभ का अर्थ है टिड्डी या टिड्डा। इस आसन को करते समय शरीर टिड्डे के समान नजर आता है। इसलिए इसे शलभासन नाम दिया गया है। इस आसन को घेरंडा संहिता में लिखे गए प्रमुख 32 योगासनों में से एक माना जाता है। अंग्रेजी में इसे टिड्डी पोज और salabhasana pose के नाम से भी जाना जाता है। वहीं आम हिंदी भाषा में टिड्डी मुद्रा के नाम से भी प्रचलित है। इसके फायदों के बारे में अधिक जानकारी नीचे दी गई है।

सलभासन के 3 फायदे | 3 Benefits Of Salabhasana

  1. वजन कम करने में
  2. मांसपेशियों के लिए
  3. तनाव और चिंता को कम करने में फायदेमद है

1. वजन कम करने में

वजन कम करने में यह आसन लाभकारी हो सकता है। इस आसन के अभ्यास से पेट की चर्बी कम हो सकती है। एनसीबीआई नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन की वेबसाइट पर प्रकाशित एक अध्ययन में उन सभी योगों का उल्लेख किया गया है जो मोटापे सहित चयापचय जोखिम प्रोफाइल को बेहतर बनाने में सहायक हो सकते हैं। इन yoga salabhasana भी शामिल है। शोध में यह भी बताया गया है कि ये आसन कमर की माप को कम करने में भी सहायक हो सकते हैं। बता दें कि मेटाबॉलिज्म सिंड्रोम या मेटाबॉलिक रिस्क फेक्टर उन जोखिम कारकों के समूह का नाम है। जो हृदय रोग स्ट्रोक और मधुमेह के खतरे को बढ़ा सकते हैं।

2. मांसपेशियों के लिए

शलभासन करते समय कूल्हे और हड्डियों के जोड़ के साथ पेट की मांसपेशियां अधिकतम तनाव salabhasana steps का अनुभव करती हैं। इसका अभ्यास उन्हें मजबूत बना सकता है। शोध बताते हैं कि यह आसन पीठ और पेट की मांसपेशियों को मजबूत कर सकता है। यह रीढ़ को लचीला बनाने में भी मदद कर सकता है। वहीं इसके नियमित अभ्यास से कमर दर्द और साइटिका नर्व यानी सायटिक नर्व से जुड़ा दर्द यानी साइटिका की समस्या को भी कम करने में मदद कर सकता है।

3. तनाव और चिंता को कम करने में फायदेमद है

तनाव कम करने में भी शलभासन योग के फायदे उठाए जा सकते हैं। लगातार तनाव की स्थिति का बने रहना कई शारीरिक और मानसिक विकारों का एक प्रमुख कारण बन सकता है। वहीं yoga salabhasana तनाव से बचने में फायदेमंद साबित हो सकता है। दरअसल इससे जुड़े एक शोध में योगों की सूची का जिक्र है। जो तनाव के साथ-साथ चिंता की स्थिति में भी लाभकारी परिणाम दिखा सकता है। इन योगासनों में शलभासन भी शामिल है। इसलिए मानसिक शांति के लिए शलभासन योग करने का तरीका कारगर साबित हो सकता है।

सलभासन को कैसे करें | How to do Salabhasana

Salabhasana

इसके लिए स्वच्छ जगह पर दरी बिछाकर उस पर पेट के बल लेट जाएं। इसके बाद अपने पैरों को ऊपर की ओर हवा में लहराएं। जबकि हाथों को आगे की ओर बढ़कर फैलाएं। कुछ समय तक इस मुद्रा में रहें। इसके बाद पुन पहली मुद्रा में आ जाएं। फिर इसे दोहराएं। अगर आपको शलभासन करने में कोई कठिनाई आती है। तो आप हाथों को ज़मीन पर भी रख सकते हैं। इस योगासन को रोजाना करें।

सलभासन करने का तरीका | Salabhasana karane ka tareeka 

salabhasana images
  • सबसे पहले स्वच्छ वातावरण में एक योग मैट बिछा लें।
  • अब पेट के बल पर लेट जाएं।
  • फिर हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और हथेलियों को जांघों के नीचे दबा लें।
  • इसके बाद अपनी एड़ियों को आपस में मिला लें।
  • अब धीरे-धीरे सांस लें, एक पैर को ऊपर उठाएं। इसे एकपाद शलभासन कहा जाता है।
  • इस अवस्था में जितना हो सके इसका प्रयोग करें और सामान्य रूप से सांस छोड़ने की प्रक्रिया को जारी रखें।
  • फिर पैर को नीचे लाएं और दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया करें।
  • इसके बाद दोनों पैरों को जितना हो सके ऊपर उठाएं।
  • यदि दोनों पैर ऊपर उठे हों तो इसे बिपोड आसन कहते हैं।
  • इस तरह आप शलभासन का एक चक्र पूरा कर लेंगे।
  • इस आसन को एक बार में तीन से चार बार तक किया जा सकता है।
  • ध्यान रहे, हर चक्र के बाद एक मिनट का विराम जरूर लें।

शलभासन करने की टिप्स | Tips for Salabhasana

  • यह आसन देखने में जितना आसान लगता है उतना है नहीं। इसे करने के दौरान शुरुआत में कुछ असुविधा महसूस हो सकती हैं।
  • शुरुआत में आप पैरों को ही ऊपर उठाने की कोशिश करें। अपने ऊपरी शरीर को जमीन पर रखें।
  • आप अपने शरीर को सहारा देने के लिए अपने हाथों से सहारा दे सकते हैं।
  • धीरे-धीरे अभ्यास शुरू करें निरंतर अभ्यास से ही इस आसन में निपुण हो सकते हैं।
  • शुरुआती लोग इस आसन को योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करें।

सलभासन की विधि | Law of Salabhasana

  • सबसे पहले आप पेट के बल लेट जाएं।
  • अपने हथेलियों को जांघों के नीचे रखें।
  • एड़ियों को आपस में जोड़ लें।
  • सांस लेते हुए अपने पैरों को यथासंभव ऊपर ले जाएं।
  • धीरे धीरे सांस लें और फिर धीरे धीरे सांस छोड़े और इस अवस्था को बनाएं रखें।
  • सांस छोड़ते हुए पांव नीचे लाएं।
  • यह एक चक्र हुआ।
  • इस तरह से आप 3 से 5 बार करें।

सलभासन की सावधानियां | Salabhasana precautions

  • इस आसन को हमेशा योग प्रशिक्षक की देखरेख में ही करने का प्रयास करें।
  • अगर कोई व्यक्ति गर्दन या रीढ़ की चोट से पीड़ित हैंतो उसे शलभासन के अभ्यास से बचना चाहिए। इस विषय पर डॉक्टर से मार्गदर्शन भी ले सकते हैं।
  • गर्भवती महिलाओं को इस आसन का अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप हृदय रोग और अस्थमा की शिकायत से पीड़ित लोगों को इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए

salabhasana ka video

FAQ

Q : सलभासन का अर्थ क्या है?

A : salabhasana (संस्कृत: शलभासन आईएएसटी शलभासन) टिड्डी मुद्रा या टिड्डी मुद्रा आधुनिक योग में व्यायाम के रूप में एक प्रवण पीठ झुकने वाला आसन है।

Q : हमें सलभासन कब करना चाहिए?

A : सुबह सबसे पहले योग का अभ्यास करना सबसे अच्छा है। लेकिन अगर आप सुबह व्यायाम नहीं कर सकते हैं, तो शाम को इसका अभ्यास करना ठीक है।

Q : सलभासन किसे नहीं करना चाहिए?

A : तीव्र पीठ दर्द या स्लिप डिस्क वाले किसी व्यक्ति को इस मुद्रा से बचना चाहिए। गंभीर कटिस्नायुशूल वाला कोई व्यक्ति यहां अधिक चोट ला सकता है क्योंकि यह मुद्रा पूरे शरीर को कूल्हे से पैरों तक कसती है। मासिक धर्म के साथ या आगे बढ़े हुए गर्भाशय के साथ बड़ी समस्याओं वाले किसी व्यक्ति को बचना चाहिए।

Q : आप शलभासन कैसे करते हैं?

A : पेट के बल लेट जाएं।,अपने दोनों हाथों को पीछे ले जाएं और एक हाथ की कलाइयों को दूसरे हाथ से पकड़ें।,अब श्वास लें; सबसे पहले अपनी छाती को जितना हो सके ऊपर उठाएं और ऊपर की ओर देखें।,अपने शरीर को दोनों तरफ से धीरे-धीरे ऊपर उठाएं।,अब सांस छोड़ते हुए वापस अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।

Q : शलभासन किस आकार का होता है?

A : सलभासन एक ऐसा आसन है जिसमें आसन करने वाला व्यक्ति शलभा या टिड्डी के आकार का हो जाता है। इसलिए इस आसन को सलभासन या टिड्डी (टिड्डी) मुद्रा कहा जाता है।

Q : सलभासन का विपरीत आसन कौन सा है?

A : नौका का अर्थ है नाव और आसन या मुद्रा जो झुकी हुई स्थिति में की जाती है उसे नौकासन के रूप में जाना जाता है। जब viparita salabhasana स्थिति में इसका अभ्यास किया जाता है तो इसे विपरीत नौकासन कहा जाता है। यह आसन कमर जांघों और रीढ़ की हड्डी के लिए अच्छा है।

Q : शलभासन किसे करना चाहिए?

A : पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए शलभासन सबसे अच्छा योग आसन है। जिन लोगों को पीठ की गंभीर समस्या है, उन्हें मकरासन और ज्येष्ठासन जैसे प्रारंभिक आसन करने के बाद धीरे-धीरे इस आसन को करना चाहिए। पीठ की समस्या वाले लोग poorna salabhasana टिड्डी मुद्रा करने से पहले ardha salabhasana-टिड्डी मुद्रा ले सकते हैं।

Q : शलभासन के क्या प्रयोग हैं?

A : साइटिका और कमर दर्द में मददगार। एब्स, कूल्हों, कमर और जांघों के आसपास की अनावश्यक चर्बी से छुटकारा पाने में मदद करता है। पीठ की मांसपेशियों और रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीलापन जोड़ता है। सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और रीढ़ की हड्डी की बीमारियों का इलाज।

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